Blood pressure रक्त चाप

Blood pressure रक्त चाप

Blood pressure (BP) is the pressure of circulating blood on the walls of blood vessels. Most of this pressure is due to work done by the heart by pumping blood through the circulatory system. Used without further specification, “blood pressure” usually refers to the pressure in large arteries of the systemic circulation. Blood pressure is usually expressed in terms of the systolic pressure (maximum during one heartbeat) over diastolic pressure (minimum in between two heartbeats) and is measured in millimeters of mercury (mmHg), above the surrounding atmospheric pressure.

Circulatory strain is one of the crucial signs, alongside respiratory rate, pulse, oxygen immersion, and body temperature. Typical resting circulatory strain in a grown-up is roughly 120 millimeters of mercury (16 kPa) systolic, and 80 millimeters of mercury (11 kPa) diastolic, shortened “120/80 mmHg”. All-inclusive, the normal pulse, age institutionalized, has stayed about the equivalent since 1975 to the present, at approx. 127/79 mmHg in men and 122/77 mmHg in ladies.


धमनीय चाप को सामान्यतः स्फिग्मोमनोमीटर द्वारा मापा जाता है, जो ऐतिहासिक रूप से संचरित दबाव को दर्शाने के लिए पारे के स्तंभ की ऊंचाई का उपयोग करता है

आज भी रक्त चाप का मान पारे के मिलीमीटरों (mmHg) में रिपोर्ट किया जाता है, हालांकि निर्द्रव और इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों में पारा प्रयुक्त नहीं होता है। प्रत्येक धड़कन के लिए, रक्त चापों में प्रकुंचन और अनुशिथिलक दबावों के बीच उतार-चढ़ाव होता है। प्रकुंचन दाब, धमनियों का उच्च दबाव है, जो हृदय-चक्र के अंत में होता है, जब ह्रदय-निलय संकुचित होते हैं। अनुशिथिलक दाब, धमनियों का न्यूनतम दबाव है, जो हृदय-चक्र के आरंभ में होता है जब निलयों में रक्त भरा होता है। एक आरामदेह, स्वस्थ वयस्क आदमी के लिए सामान्यतः मापे गए मान का उदाहरण है 115 mmHg प्रकुंचन और 75 mmHg अनुशिथिलक (जिसे 115/75 mmHg लिखा और (US में) “एक सौ पंद्रह बटे पचहत्तर ” कहा जाता है।)नाड़ी दबाव, प्रकुंचन और अनुशिथिलक दाब के बीच का अंतर है। प्रकुंचन और अनुशिथिलक धमनीय रक्त-चाप स्थिर नहीं होते हैं, किन्तु एक से दूसरे धड़कन के बीच और दिन भर (जैव-चक्रीय आवर्तन में) स्वाभाविक घट-बढ़ होता रहता है। ये तनाव, पोषक तत्त्व, दवाई, बीमारी, कसरत और एकदम खडे होने आदि से भी परिवर्तित होते हैं। कभी-कभी बहुत अधिक घट-बढ़ होता है। उच्च रक्त-चाप, धमनीय दबाव का असामान्य रूप से अधिक होने की ओर इंगित करता है, जबकि इसके विपरीत अल्प रक्त-चाप असामान्य रूप से कम होने का संकेत देता है।शरीर तापमान और नाड़ी-दर के साथ-साथ रक्त-चाप मापन, अति सामान्य शारीरिक मापदंड है। धमनीय दबाव को वेध्य (त्वचा में चुभा कर और रक्त वाहिकाओं के अंदर माप कर) या अवेध्य तरीक़े से मापा जा सकता है। पहले तरीक़े को सामान्यतः अस्पताल परिवेश तक ही सीमित रखा जाता है